श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.198.23 
अथास्य ब्राह्मणो हस्तमगृह्णात्। अब्रवीच्चैनं जितक्रोधोऽसि न ते किञ्चिदपरित्याज्यं ब्राह्मणार्थे ब्राह्मणोऽपि तं महाभागं सभाजयत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण ने उनका हाथ पकड़कर कहा - 'हे राजन! आपने अपने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है। आपके पास ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो आप ब्राह्मण को न दे सकें।' ऐसा कहकर ब्राह्मण ने भी उन श्रेष्ठ राजा का आदर किया॥23॥
 
‘Then the Brahmin held his hand and said, ‘O King! You have conquered your anger. You do not have anything that you cannot give to a Brahmin.’ Saying this, the Brahmin also respected that great king.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)