श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.198.20 
अथ शिबिस्तथैवाविकृतमुखवर्णो नगरं प्रविश्य ब्राह्मणं तमब्रवीत् सिद्धं भगवन्नन्नमिति ब्राह्मणो न किंचिद् व्याजहार विस्मयादधोमुखश्चासीत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह सब सुनने के बाद भी राजा शिबि के चेहरे की चमक पहले जैसी ही रही। उसमें ज़रा भी बदलाव नहीं आया। उन्होंने नगर में प्रवेश किया और ब्राह्मण से कहा - 'भगवन्! आपका भोजन तैयार है।' ब्राह्मण कुछ नहीं बोला। वह आश्चर्य से सिर झुकाए देखता रहा।
 
Even after hearing all this, the glow on King Sibi's face remained the same as before. There was no change in it at all. He entered the city and said to the Brahmin - 'Lord! Your food is ready.' The Brahmin did not say anything. He kept looking with his head lowered in surprise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)