श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  3.198.16-17 
अथैकेन यातव्यं स्यात् कोऽवतरेत् पुनर्नारद आह शिबिर्यायादहमवतरेयमत्र किं कारणमित्यब्रवीत्। असावहं शिबिना समो नास्मि यतो ब्राह्मण: कश्चिदेनमब्रवीत्॥ १६॥
शिबे अन्नार्थ्यस्मीति तमब्रवीच्छिबि: किं क्रियतामाज्ञापयतु भवानिति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यह पूछने पर कि, ‘यदि हममें से केवल शिबि को ही आपके साथ स्वर्ग जाना हो, तो पहले कौन उतरेगा?’ नारदजी ने फिर कहा, ‘शिबि जाएंगे और मैं उतरूंगा। इसका क्या कारण है?’ ऐसा पूछने पर देवर्षि नारद बोले, ‘मैं राजा शिबि के समान नहीं हूँ, क्योंकि एक दिन एक ब्राह्मण ने शिबि से कहा कि, ‘शिबे! मुझे भोजन करना है।’ राजा ने पूछा कि, ‘आपके लिए क्या भोजन तैयार किया जाए, कृपया आदेश दें।’॥16-17॥
 
On being asked, ‘If only Shibi among us has to go to heaven with you, who will descend first?’ Naradji again said, ‘Shibi will go and I will descend. What is the reason for this?’ On being asked this, Devarshi Narad said, ‘I am not like King Shibi, because one day a Brahmin said to Shibi, ‘Shibe! I want to eat food.’ The king asked, ‘What food should be prepared for you, please order.’॥16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)