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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन
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श्लोक 12
श्लोक
3.198.12
किं कारणमित्यपृच्छदथाचष्ट नारद:। अहं परिभ्रमन् वसुमनसो गृहमुपस्थित:॥ १२॥
अनुवाद
फिर उन्होंने पूछा, ‘इसका क्या कारण है?’ नारद बोले, ‘एक दिन घूमते-घूमते मैं वसुमना के घर पहुंच गया।
Then he asked, 'What is the reason for this?' Narada said, 'One day while wandering around I reached the house of Vasumana.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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