श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.197.9-10 
अथ श्येनो राजनमब्रवीत्॥ ९॥
पर्यायेण वसतिर्वा भवेषु
सर्गे ज्ञात: पूर्वमस्मात् कपोतात्।
त्वमाददानोऽथ कपोतमेनं
मा त्वं राजन् विघ्नकर्ता भवेथा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बाज ने राजा से कहा—‘महाराज! प्रायः सभी प्राणियों को क्रम से भिन्न-भिन्न योनियों में जन्म लेना पड़ता है। ऐसा प्रतीत होता है कि आपने इस सृष्टि में पहले कभी इस कबूतर से जन्म लिया है; इसीलिए इसे अपने संरक्षण में ले रहे हैं! हे राजन! मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप इस कबूतर को अपने साथ ले जाकर मेरे भोजन में विघ्न न डालें।’॥9-10॥
 
Thereafter the hawk said to the king—‘Maharaj! Usually all living beings have to take birth in different species one after the other. It seems that you have taken birth from this pigeon sometime before in this creation; that is why you are taking it under your protection! O King! I request you to not disturb my meal by taking this pigeon with you.'॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)