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mahabharat 3.197.7: मुझे ब्रह्मचारी समझो। मैंने वेदों का अध्ययन करके अपने शरीर को दुर्बल कर लिया है। मैं तपस्वी हूँ और अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया है। मैं अपने गुरु के विरुद्ध कभी नहीं बोलता। अतः मुझे योग में तत्पर और निष्पाप समझो॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 3.197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.197.7 
स्वाध्यायेन कर्शितं ब्रह्मचारिणं मां विद्धि। तपसा दमेन युक्तमाचार्यस्याप्रतिकूलभाषिणम्। एवं युक्तमपापं मां विद्धि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मुझे ब्रह्मचारी समझो। मैंने वेदों का अध्ययन करके अपने शरीर को दुर्बल कर लिया है। मैं तपस्वी हूँ और अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया है। मैं अपने गुरु के विरुद्ध कभी नहीं बोलता। अतः मुझे योग में तत्पर और निष्पाप समझो॥ 7॥
 
‘Consider me a brahmacari. I have weakened my body by studying the Vedas. I am an ascetic and have controlled my senses. I never speak against my teacher. Thus, consider me to be engaged in yoga and sinless.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)