श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.197.5 
वसु ददातु अन्तवान् पार्थिवोऽस्य निष्कृतिं कुर्याद् घोरं कपोतस्य निपातमाहु:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु विद्वान पुरुष कहते हैं कि 'कबूतर का इस प्रकार आकर गिरना किसी भयंकर अनिष्ट का लक्षण है।' ऐसा प्रतीत होता है कि तुम्हारी मृत्यु निकट है; अतः तुम्हें इस उपद्रव को शांत करना चाहिए। तुम्हें धन का दान करना चाहिए।'॥5॥
 
‘But learned men say that ‘the pigeon coming and falling like this is a sign of a terrible evil.’ It seems that your death is near; therefore you should pacify this disturbance. You should donate money.’॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)