श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.197.4 
अथ पुरोहितो राजानमब्रवीत्। प्राणरक्षार्थं श्येनाद् भीतो भवन्तं प्राणार्थी प्रपद्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर पुरोहित ने राजा से कहा - 'महाराज! यह कबूतर बाज के भय से अपनी जान बचाने के लिए आपकी शरण में आया है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार अपनी जान बचाना है।'॥4॥
 
Seeing this the priest said to the king - 'Maharaj! This pigeon has come to you for shelter in fear of a hawk to save its life. Its intention is to save its life somehow. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)