श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.197.25 
कपोत उवाच
वैश्वानरोऽहं ज्वलनो धूमकेतु-
रथैव श्येनो वज्रहस्त: शचीपति:।
साधु ज्ञातुं त्वामृषभं सौरथेय
नौ जिज्ञासया त्वत्सकाशं प्रपन्नौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
कबूतर बोला- राजन! मैं धूम्रवर्णी ध्वजा से सुशोभित वैश्वानर अग्नि हूँ और उस गरुड़ के रूप में साक्षात् वज्रधारी शचीपति इन्द्र थे। सुरतानंदन! आप महापुरुष हैं। हम दोनों आपकी श्रेष्ठता की परीक्षा लेने के लिए यहाँ आये हैं। 25॥
 
The pigeon said- Rajan! I am Vaishwanar Agni adorned with the smoky flag and in the form of that eagle was the real thunderbolt wielding Sachipati Indra. Surthanandan! You are a great man. We both came here to test your superiority. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)