श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.197.20 
श्येन उवाच
ऊरोर्दक्षिणादुत्कृत्य स्वपिशितं तावद् राजन् यावन्मांसं कपोतेन समम्। तथा तस्मात् साधु त्रात: कपोत: प्रशंसेयुश्च शिबय: कृतं च प्रियं स्यान्ममेति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
बाज ने कहा, "हे राजन! अपनी दाहिनी जांघ से इस कबूतर के बराबर मांस काट लीजिए। ऐसा करने से कबूतर की जान बच जाएगी। ऐसा करने से शिबिदेश के लोग आपकी बहुत प्रशंसा करेंगे और मेरा मनोवांछित कार्य भी पूरा हो जाएगा।"
 
The eagle said— O King! Cut off as much flesh from your right thigh as is equal to this pigeon. By doing this the pigeon can be saved well. By doing this the people of Shibidesh will praise you a lot and my desired task will also be accomplished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)