श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 197: इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.197.11 
राजोवाच
केनेदृशी जातु परा हि दृष्टा
वागुच्यमाना शकुनेन संस्कृता।
यां वै कपोतो वदते यां च श्येन
उभौ विदित्वा कथमस्तु साधु॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा बोले - हे! किसी पक्षी के मुख से संस्कृत भाषा का इतना अच्छा उच्चारण किसने देखा या सुना है, जैसा ये कबूतर और चील बोल रहे हैं? इनका स्वभाव जानकर इनके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार कैसे किया जा सकता है?॥11॥
 
The king said - Oh! Who has ever seen or heard such a good pronunciation of Sanskrit language from the mouth of any bird, as this pigeon and eagle are speaking? How can one behave justly towards them after knowing their nature?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)