Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.196.10: ऐसा कहकर वह ब्राह्मण उसे शाप देने के लिए तैयार हो गया। तब राजा ने उससे कहा- 'विप्रवर! जो आपको अपना धन नहीं देता, क्या उसे शाप देना उचित है? अथवा ब्राह्मण का यही उचित कर्म है?'॥10॥ | mahabharat अध्याय 3.196: सेदुक और वृषदर्भका चरित्र । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमुक्त्वा तं शपन्तं राजाऽऽह। विप्र किं यो न ददाति तुभ्यमुताहोस्विद् ब्राह्मण्यमेतत्॥ १०॥
अनुवाद
ऐसा कहकर वह ब्राह्मण उसे शाप देने के लिए तैयार हो गया। तब राजा ने उससे कहा- 'विप्रवर! जो आपको अपना धन नहीं देता, क्या उसे शाप देना उचित है? अथवा ब्राह्मण का यही उचित कर्म है?'॥10॥
Having said this, the Brahmin got ready to curse him. Then the king said to him- 'Vipravar! Is it right to curse someone who does not give you his wealth? Or is this the proper act of a Brahmin?'॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥