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mahabharat 3.195.5: मैं तुम्हें एक हज़ार लाल गायें इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि न्यायपूर्वक भिक्षा मांगने वाला ब्राह्मण मुझे बहुत प्रिय है। मैं भिखारी पर कभी क्रोधित नहीं होता और दिए हुए धन के लिए कभी पश्चाताप नहीं करता।   |   mahabharat अध्याय 3.195: राजा ययातिद्वारा ब्राह्मणको सहस्र गौओंका दान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 195: राजा ययातिद्वारा ब्राह्मणको सहस्र गौओंका दान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.195.5 
ददामि ते रोहिणीनां सहस्रं
प्रियो हि मे ब्राह्मणो याचमान:।
न मे मन: कुप्यति याचमाने
दत्तं न शोचामि कदाचिदर्थम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें एक हज़ार लाल गायें इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि न्यायपूर्वक भिक्षा मांगने वाला ब्राह्मण मुझे बहुत प्रिय है। मैं भिखारी पर कभी क्रोधित नहीं होता और दिए हुए धन के लिए कभी पश्चाताप नहीं करता।
 
I am giving you a thousand red cows because a Brahmin who begs justly is very dear to me. I never get angry with a beggar and I never repent for the money I give.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)