Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.195.4: राजा ने कहा - हे दान लेने के अधिकारी ब्राह्मण! मैं आपको कोई वस्तु देकर बार-बार उसकी चर्चा नहीं करता और प्रतिज्ञा करके कहता हूँ कि मेरे पास ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो आपके माँगने योग्य न हो। यदि मैं प्राप्त होने योग्य वस्तु देने की प्रतिज्ञा करूँ, तो उसे देकर मुझे अधिक प्रसन्नता होगी॥4॥ | mahabharat अध्याय 3.195: राजा ययातिद्वारा ब्राह्मणको सहस्र गौओंका दान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजोवाच
न चानुकीर्तयेदद्य दत्त्वा
अयाच्यमर्थं न च संशृणोमि।
प्राप्यमर्थं च संश्रुत्य
तं चापि दत्त्वा सुसुखी भवामि॥ ४॥
अनुवाद
राजा ने कहा - हे दान लेने के अधिकारी ब्राह्मण! मैं आपको कोई वस्तु देकर बार-बार उसकी चर्चा नहीं करता और प्रतिज्ञा करके कहता हूँ कि मेरे पास ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो आपके माँगने योग्य न हो। यदि मैं प्राप्त होने योग्य वस्तु देने की प्रतिज्ञा करूँ, तो उसे देकर मुझे अधिक प्रसन्नता होगी॥4॥
The king said - O Brahmin, who is entitled to receive gifts! I do not discuss anything again and again after giving it to you and I say it with a promise that I do not have any such thing which is not worth asking for by you. If I promise to give the thing which can be obtained, then I will be happier by giving it. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥