इस प्रकार नारदजी ने स्वयं अपने मुख से राजा शिबिकि महात्मा का वर्णन किया ॥8॥
‘In this way Naradji personally described King Shibiki Mahatma from his own mouth.’ 8॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि शिबिचरिते चतुर्नवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें शिबिचरितविषयक
एक सौ चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)