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mahabharat 3.194.5: यदि मनुष्य चाहे तो अपने प्रति किये गए उपकार का सौ गुना बदला चुका सकता है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि केवल देवताओं में ही ऐसी भावना हो। हे मित्र! उशीनर के पुत्र शिबिक का चरित्र और स्वभाव तुमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.194: क्षत्रिय राजाओंका महत्त्व—सुहोत्र और शिबिकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 194: क्षत्रिय राजाओंका महत्त्व—सुहोत्र और शिबिकी प्रशंसा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.194.5 
कृतं शतगुणं कुर्यान्नास्ति देवेषु निर्णय:।
औशीनर: साधुशीलो भवतो वै महीपति:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यदि मनुष्य चाहे तो अपने प्रति किये गए उपकार का सौ गुना बदला चुका सकता है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि केवल देवताओं में ही ऐसी भावना हो। हे मित्र! उशीनर के पुत्र शिबिक का चरित्र और स्वभाव तुमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ है।॥5॥
 
If a human being wishes, he can repay a favour done to him hundredfold. There is no such rule that only the gods have this feeling of reciprocation. Dear friend! The character and nature of Shibika, son of Ushinara, is far better than yours. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)