श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.193.5 
एतदिच्छामि भगवन् बकशक्रसमागमम्।
सुखदु:खसमायुक्तं तत्त्वेन कथयस्व मे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! बक और इन्द्र का यह मिलन (अमर पुरुषों के) सुख-दुःख की बातों से भरा हुआ कहा गया है। मैं इसे सुनना चाहता हूँ; कृपया इसका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।॥5॥
 
Lord! This meeting of Bak and Indra is said to be full of talks of joys and sorrows (of immortal men). I want to hear it; please describe it in detail.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)