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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद
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श्लोक 29
श्लोक
3.193.29
अपि शाकं पचानस्य सुखं वै मघवन् गृहे।
अर्जितं स्वेन वीर्येण नाप्यपाश्रित्य कञ्चन॥ २९॥
अनुवाद
हे इन्द्र! सुख तो उसी को प्राप्त होता है जो अपने पराक्रम से घर में केवल शाक पकाता और खाता है, किसी से सहायता नहीं लेता।
Indra! Happiness is attained only by the one who by his own valour cooks and eats only vegetables at home and does not take help from anyone else.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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