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mahabharat 3.193.24: कुलीन लोग भी नीच जाति के लोगों के प्रभाव से दुःखी हो रहे हैं और धनवान लोग निर्धनों को सता रहे हैं। इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है?॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 3.193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.193.24 
कुले जाताश्च क्लिश्यन्ते दौष्कुलेयवशानुगा:।
आढ्यैर्दरिद्राश्चाक्रान्ता: किं नु दु:खतरं तत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कुलीन लोग भी नीच जाति के लोगों के प्रभाव से दुःखी हो रहे हैं और धनवान लोग निर्धनों को सता रहे हैं। इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है?॥ 24॥
 
Even the noble people are suffering under the influence of the low caste people and the rich people are harassing the poor. What can be more sad than this?॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)