श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.193.23 
देवदानवगन्धर्वमनुष्योरगराक्षसा:।
प्राप्नुवन्ति विपर्यासं किं नु दु:खतरं तत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
देवता, दानव, गन्धर्व, मनुष्य, नाग और राक्षस - ये सब विपरीत गति में पहुँचकर क्या बन जाते हैं? इससे बढ़कर और क्या दुःख हो सकता है?॥23॥
 
Gods, demons, Gandharvas, humans, serpents and demons - what do they all become when they reach the opposite state? What could be a greater sorrow than this?॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)