श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.193.21 
अकुलानां कुले भावं कुलीनानां कुलक्षयम्।
संयोगं विप्रयोगं च पश्यन्ति चिरजीविन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
दीर्घायु पुरुष नीच कुलों की उन्नति, उच्च कुलों के कुलों का नाश तथा संयोग और वियोग को देखते रहते हैं ॥21॥
 
Long-living men keep witnessing the progress of the families of the lowly, the destruction of the families of the high-class, and union and separation. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)