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mahabharat 3.193.18: बगुले ने कहा - हे प्रभु! अप्रिय लोगों के साथ रहना पड़ता है। प्रियजनों की मृत्यु के बाद उनके वियोग का दुःख भोगते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है और दुष्ट लोगों का संग मिलता है। दीर्घायु लोगों के लिए यही सबसे बड़ा दुःख है॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 3.193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.193.18 
बक उवाच
अप्रियै: सह संवास: प्रियैश्चापि विनाभव:।
असद्भि: सम्प्रयोगश्च तद् दु:खं चिरजीविनाम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बगुले ने कहा - हे प्रभु! अप्रिय लोगों के साथ रहना पड़ता है। प्रियजनों की मृत्यु के बाद उनके वियोग का दुःख भोगते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है और दुष्ट लोगों का संग मिलता है। दीर्घायु लोगों के लिए यही सबसे बड़ा दुःख है॥ 18॥
 
The crane said - O lord! One has to live with unpleasant people. After the death of loved ones, one has to spend life suffering the pain of their separation and gets the company of evil people. This is the greatest sorrow for long-lived people.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)