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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.193.17 
शतं वर्षसहस्राणि मुने जातस्य तेऽनघ।
समाख्याहि मम ब्रह्मन् किं दु:खं चिरजीविनाम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मैं निर्दोष हूँ! आपकी आयु एक लाख वर्ष की हो गयी है। हे ब्रह्मन्! अपने अनुभव के आधार पर बताइये कि दीर्घायु मनुष्यों को कौन-से दुःख होते हैं?
 
I am innocent! Your age has reached one lakh years. Brahman! On the basis of your experience, tell us what sorrows the long-lived people experience?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)