श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.192.8 
स श्रुत्वाचिन्तयन्नेह मनुष्यगतिं पश्यामि कस्य खल्वयं गीतशब्द इति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर राजा सोचने लगा, 'यहाँ मनुष्यों की गति तो दिखाई नहीं देती, फिर यह किसका गीत सुनाई दे रहा है?'॥8॥
 
Hearing it the king began to think, 'Here the movement of humans is not visible. Then whose song is this that is being heard?'॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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