श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.192.70 
वामदेव उवाच
त्वया त्रातं राजकुलं शुभेक्षणे
वरं वृणीष्वाप्रतिमं ददानि ते।
प्रशाधीमं स्वजनं राजपुत्रि
इक्ष्वाकुराज्यं सुमहच्चाप्यनिन्द्ये॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
वामदेव बोले, "हे शुभ नेत्रों वाली सुन्दरी राजकुमारी! तुमने इस राजकुल को ब्राह्मण के कोप से बचाया है। इसके लिए कोई अनोखा वर मांगो। मैं तुम्हें अवश्य दूंगा। तुम इन स्वजनों के हृदय तथा इक्ष्वाकु के विशाल राज्य पर शासन करो।"
 
Vaamadev said, "O beautiful princess with auspicious eyes, you have saved this royal family from the wrath of the Brahmin. Ask for a unique boon for this. I will certainly give it to you. You rule over the hearts of these relatives and the vast kingdom of Ikshwaku. 70.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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