श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.192.68 
वामदेव उवाच
संस्पृश्यैनां महिषीं सायकेन
ततस्तस्मादेनसो मोक्ष्यसे त्वम्।
ततस्तथा कृतवान् पार्थिवस्तु
ततो मुनिं राजपुत्री बभाषे॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
वामदेवजी ने कहा - हे राजन! यदि आप इस बाण से अपनी रानी को स्पर्श कर लेंगे तो आप ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाएँगे। तब राजा ने वैसा ही किया। तत्पश्चात राजकुमारी ने ऋषि को बताया।
 
Vaamdevji said - O King! If you touch your queen with this arrow, you will be freed from the sin of killing a brahmin. Then the king did the same. Thereafter the princess told the sage.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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