Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.192.67: राजा ने कहा, "हे इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियों! देखो, मैं फँस गया हूँ। अब मैं यह बाण नहीं चला पाऊँगा। अतः वामदेव को नष्ट करने का उत्साह समाप्त हो गया। अतः ये महामुनि दीर्घायु हुए।" | mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजोवाच
इक्ष्वाकव: पश्यत मां गृहीतं
न वै शक्नोम्येष शरं विमोक्तुम्।
न चास्य कर्तुं नाशमभ्युत्सहामि
आयुष्मान् वै जीवतु वामदेव:॥ ६७॥
अनुवाद
राजा ने कहा, "हे इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियों! देखो, मैं फँस गया हूँ। अब मैं यह बाण नहीं चला पाऊँगा। अतः वामदेव को नष्ट करने का उत्साह समाप्त हो गया। अतः ये महामुनि दीर्घायु हुए।"
The king said— O Kshatriyas of the Ikshwaku dynasty! Look, I am trapped. Now I will not be able to shoot this arrow. Therefore, the enthusiasm to destroy Vaamdev vanished. Therefore, this great sage lived a long life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥