श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.192.6 
तच्च विवेश ततस्तस्य वनखण्डस्य मध्येऽतीव रमणीयं सरो दृष्ट्वा साश्व एव व्यगाहत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'तब राजा उसमें प्रवेश कर गया। उस वन के मध्य में एक अत्यंत सुंदर सरोवर था। उसे देखकर राजा अपने घोड़े सहित सरोवर के जल में उतर गया।'
 
‘Then the king entered it. In the centre of that forest was a very beautiful lake. Seeing it the king entered the water of the lake along with his horse.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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