Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.192.56: वामदेव बोले, "हे राजन! ब्राह्मणों को मन, वाणी या कर्म से कोई अनुशासन या दण्ड नहीं दिया जा सकता। ऐसा जानकर जो मनुष्य बड़ी कठिनाई से ब्राह्मण की सेवा करता है, वह श्रेष्ठ बनता है और ब्राह्मण की सेवा करके ही अपना जीवन निर्वाह करता है। 56।   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.192.56 
वामदेव उवाच
नानुयोगा ब्राह्मणानां भवन्ति
वाचा राजन् मनसा कर्मणा वा।
यस्त्वेवं ब्रह्म तपसान्वेति विद्वां-
स्तेन श्रेष्ठो भवति हि जीवमान:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
वामदेव बोले, "हे राजन! ब्राह्मणों को मन, वाणी या कर्म से कोई अनुशासन या दण्ड नहीं दिया जा सकता। ऐसा जानकर जो मनुष्य बड़ी कठिनाई से ब्राह्मण की सेवा करता है, वह श्रेष्ठ बनता है और ब्राह्मण की सेवा करके ही अपना जीवन निर्वाह करता है। 56।
 
Vaamadev said, "O King! No discipline or punishment can be applied to Brahmins by mind, speech or action. Knowing this, one who serves a Brahmin with great difficulty becomes superior and lives by the act of serving a Brahmin. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)