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mahabharat 3.192.53: राजा ने कहा - हे वामदेव! आप ब्राह्मण होकर भी मन, वचन और कर्म से मुझे मारने पर तुले हुए हैं। हमारे सेवक, जिन्हें यह बात पता चल गई है, मेरी आज्ञा पाकर तीखे त्रिशूल और तलवार हाथ में लेकर यहीं आपके शिष्यों सहित आपको मार डालेंगे। 53.   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.192.53 
राजोवाच
ये त्वां विदुर्ब्राह्मणं वामदेव
वाचा हन्तुं मनसा कर्मणा वा।
ते त्वां सशिष्यमिह पातयन्तु
मद्वाक्यनुन्ना:शितशूलासिहस्ता:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा - हे वामदेव! आप ब्राह्मण होकर भी मन, वचन और कर्म से मुझे मारने पर तुले हुए हैं। हमारे सेवक, जिन्हें यह बात पता चल गई है, मेरी आज्ञा पाकर तीखे त्रिशूल और तलवार हाथ में लेकर यहीं आपके शिष्यों सहित आपको मार डालेंगे। 53.
 
The king said - O Vaamadev! Even though you are a Brahmin, you are intent on killing me by your thoughts, words and actions. Our servants who have come to know of this, will, on getting my order, take sharp tridents and swords in their hands and will kill you along with your disciples here itself. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)