Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.192.47: शिष्य ने लौटकर उपाध्याय को ये सब बातें बताईं। उन अप्रिय वचनों को सुनकर वामदेव क्रोध से भर गए और स्वयं राजा के पास जाकर उनसे घोड़े लौटा देने को कहा। परन्तु राजा ने वे घोड़े नहीं लौटाए॥47॥   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.192.47 
स गत्वैतदुपाध्यायायाचष्ट तच्छ्रुत्वा वचनमप्रियं वामदेव: क्रोधपरीतात्मा स्वयमेव राजानभिगम्याश्वार्थमचोदयन्न चाददद् राजा॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
शिष्य ने लौटकर उपाध्याय को ये सब बातें बताईं। उन अप्रिय वचनों को सुनकर वामदेव क्रोध से भर गए और स्वयं राजा के पास जाकर उनसे घोड़े लौटा देने को कहा। परन्तु राजा ने वे घोड़े नहीं लौटाए॥47॥
 
‘The disciple returned and told all these things to Upadhyaya. On hearing those unpleasant words, Vaamadev was filled with anger and went to the king himself and asked him to return the horses. But the king did not return those horses.'॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)