श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.192.4 
तमेकाश्वेन मृगमनुसरन्तं मृगो दूरमपाहरत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
एक ही घोड़े की सहायता से उन्होंने एक भयंकर पशु का पीछा किया, और वह पशु उन्हें बहुत दूर ले गया॥4॥
 
‘With the help of a single horse they chased a ferocious animal. The animal took them far away.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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