श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 39-41
 
 
श्लोक  3.192.39-41 
अथ कदाचिच्छलो मृगयामनुचरन् मृगमासाद्य रथेनान्वधावत्॥ ३९॥
सूतं चोवाच शीघ्रं मां वहस्वेति स तथोक्त: सूतो राजानमब्रवीत्॥ ४०॥
न क्रियतामनुबन्धो नैष शक्यस्त्वया मृगोऽयं ग्रहीतुं यद्यपि ते रथे युक्तौ वाम्यौ स्यातामिति। ततोऽब्रवीद् राजा सूतमाचक्ष्व मे वाम्यौ हन्मि च त्वामिति। स एवमुक्तो राजभयभीत: सूतो वामदेव-शापभीतश्च सन्नाचख्यौ राज्ञे। तत: पुन: स राजा खड्गमुद्यम्य शीघ्रं कथयस्वेति तमाह हनिष्ये त्वामिति। स तदाऽऽह राजभयभीत: सूतो वामदेवस्याश्वौ वाम्यौ मनोजवाविति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘इसके बाद एक दिन महाराज शाल शिकार के लिए वन में गए। वहाँ उन्होंने एक जंगली पशु को अपने सामने पाया और उसे अपने रथ से भगाते हुए सारथी से कहा- ‘मुझे शीघ्र ही मृग के पास ले चलो’। उनके ऐसा कहने पर सारथी ने कहा- ‘महाराज! इस पशु को पकड़ने की जिद न करें। यह आपकी पकड़ में नहीं आ सकता। यदि आपके रथ में दोनों वाम्य घोड़े जुते होते, तो आप इसे पकड़ लेते।’ यह सुनकर राजा ने सारथी से पूछा- ‘सारथी! बताओ, ये वाम्य घोड़े कौन से हैं, अन्यथा मैं तुम्हें अभी मार डालूँगा।’ यह सुनकर सारथी भय से काँप उठा। दूसरी ओर उसे घोड़ों का परिचय देने पर वामदेव ऋषि के श्राप का भी भय था। इसलिए उसने राजा से कुछ नहीं कहा। तब राजा ने पुनः तलवार उठाकर कहा- ‘अरे! शीघ्र बताओ, अन्यथा मैं तुम्हें अभी मार डालूँगा।’ तब वह राजा के भय से व्याकुल होकर बोला- ‘महाराज! वामदेव मुनि के पास 'वाम्य' नामक दो घोड़े हैं। वे मन के समान वेगवान हैं।॥39-41॥
 
‘Thereafter one day Maharaj Shal went to the forest for hunting. There he found a wild animal in front of him and chased it in his chariot and said to the charioteer- ‘Take me to the deer quickly’. On his saying this the charioteer said- ‘Maharaj! Do not insist on catching this animal. It cannot come in your grasp. If both the Vamya horses were harnessed in your chariot, then you would have caught it.’ On hearing this the king asked the charioteer- ‘Charioteer! Tell me, which are the Vamya horses, otherwise I will kill you right now.’ On hearing this the charioteer trembled with fear. On the other hand he was also afraid of the curse of Vamdev Rishi on introducing the horses. Therefore he did not say anything to the king. Then the king again raised his sword and said- ‘Hey! Tell me quickly, otherwise I will kill you right now.’ Then he, troubled by the fear of the king, said- ‘Maharaj! Vamdev Muni has two horses which are called ‘Vamya’. They are as swift as the mind.'॥ 39-41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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