श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.192.36 
स च राजा तामुपलभ्य तस्यां सुरतगुणनिबद्धहृदयो लोकत्रयैश्वर्यमिवोपलभ्य हर्षेण बाष्पकलया वाचा प्रणिपत्याभिपूज्य मण्डूकराजमब्रवीदनुगृहीतोऽस्मीति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
शुभोना के कामुक गुणों ने राजा का मन मोह लिया। उसे पाकर वे इतने प्रसन्न हुए मानो उन्हें तीनों लोकों का राज्य मिल गया हो। हर्ष के आँसू बहाते हुए उन्होंने मेंढकराज को प्रणाम किया और उनका यथोचित सम्मान करते हुए हर्षित स्वर में कहा - 'मेंढकों के राजा! आपने मुझ पर बड़ी कृपा की है।'
 
‘The King's heart was captivated by the sensual qualities of Shubhona. He was so happy to get her as if he had got the kingdom of the three worlds. Shedding tears of joy, he bowed down to the King of the Frogs and while honouring him appropriately, he said in a joyful voice - 'King of the Frogs! You have been very kind to me'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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