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श्लोक 3.192.3  |
| ‘अयोध्यायामिक्ष्वाकुकुलोद्वह: पार्थिव: परिक्षिन्नाम मृगयामगमत्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| ‘अयोध्यापुरी में इक्ष्वाकुकुल के वीर एवं पराक्रमी राजा परीक्षित रहते थे। एक दिन वे शिकार खेलने गए॥3॥ |
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| ‘In Ayodhyapuri, the brave and brave King Parikshit of Ikshvakukul lived. One day they went hunting. 3॥ |
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