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mahabharat 3.192.28: अच्युत! मेंढकों को मारने की इच्छा मत करो। क्रोध पर नियंत्रण रखो; क्योंकि अकारण कर्म करने वालों की धन-वृद्धि नष्ट हो जाती है।   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.192.28 
मा मण्डूकान् जिघांस त्वं कोपं संधारयाच्युत।
प्रक्षीयते धनोद्रेको जनानामविजानताम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अच्युत! मेंढकों को मारने की इच्छा मत करो। क्रोध पर नियंत्रण रखो; क्योंकि अकारण कर्म करने वालों की धन-वृद्धि नष्ट हो जाती है।
 
Achyuta! Do not wish to kill the frogs. Control your anger; because the growth of wealth of those who act without reason is destroyed. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)