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mahabharat 3.192.27: ‘हे राजन! क्रोध में मत डूबो। हम पर दया करो। निर्दोष मेंढकों को मत मरवाओ।’ इस संदर्भ में ये दो श्लोक भी प्रसिद्ध हैं-॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.192.27 
मा राजन् क्रोधवशं गम: प्रसादं कुरु नार्हसि मण्डूकानामनपराधिनां वधं कर्तुमिति। श्लोकौ चात्र भवत:—॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘हे राजन! क्रोध में मत डूबो। हम पर दया करो। निर्दोष मेंढकों को मत मरवाओ।’ इस संदर्भ में ये दो श्लोक भी प्रसिद्ध हैं-॥27॥
 
‘O King! Do not be overcome by anger. Be kind to us. Do not get the innocent frogs killed.’ These two verses are also famous in this context -॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)