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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता
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श्लोक 26
श्लोक
3.192.26
ततो मण्डूकराट् तापसवेषधारी राजानमभ्यगच्छदुपेत्य चैनमुवाच॥ २६॥
अनुवाद
तब मण्डूकराज तपस्वी वेश धारण करके राजा के पास गया और निकट आकर उससे इस प्रकार बोला -॥26॥
‘Then the King of Mandukas, dressed as an ascetic, went to the king and on coming close spoke to him thus -॥ 26॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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