श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  3.192.23-24 
तां स मृगयमाणो राजा नापश्यद् वापीमथ नि:स्राव्य मण्डूकं श्वभ्रमुखे दृष्ट्वा क्रुद्ध आज्ञापयामास स राजा॥ २३॥
सर्वत्र मण्डूकवध: क्रियतामिति यो मयार्थी स मां मृतमण्डूकोपायनमादायोपतिष्ठेदिति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजा ने उस कुएँ में रानी को बहुत ढूँढ़ा, परन्तु वह कहीं दिखाई न दी। तब उसने कुएँ का सारा पानी निकाल दिया। इसके बाद एक गड्ढे के मुँह पर एक मेंढक दिखाई दिया। इससे राजा को बड़ा क्रोध आया और उसने आदेश दिया कि 'हर जगह मेंढकों को मार डाला जाए। जो कोई मुझसे मिलना चाहे, वह मरे हुए मेंढक की भेंट लेकर मेरे पास आए।'॥23-24॥
 
‘The king searched for the queen a lot in that well, but she was nowhere to be seen. Then he drained out all the water from the well. After this, a frog was seen at the mouth of a hole. This made the king very angry and he ordered that ‘frogs should be killed everywhere. Whoever wants to meet me, should come to me with a gift of a dead frog.’॥ 23-24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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