श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.192.22 
अथ तां देवीं स राजाब्रवीत् साध्ववतर वापीसलिलमिति। सा तद्वच: श्रुत्वावतीर्य वापीं न्यमज्जन्न पुनरुदमज्जत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा ने रानी से कहा - ‘देवि! इस कुएँ के जल में सावधानी से गोता लगाओ।’ राजा के ये वचन सुनकर वह कुएँ में उतर गई और गोता लगाकर फिर कभी बाहर नहीं आई॥ 22॥
 
‘At that time the king said to the queen - 'Devi! Dive into the water of this well cautiously.' On hearing these words of the king, she entered the well and dived and never came out again.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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