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श्लोक 3.192.22  |
| अथ तां देवीं स राजाब्रवीत् साध्ववतर वापीसलिलमिति। सा तद्वच: श्रुत्वावतीर्य वापीं न्यमज्जन्न पुनरुदमज्जत्॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय राजा ने रानी से कहा - ‘देवि! इस कुएँ के जल में सावधानी से गोता लगाओ।’ राजा के ये वचन सुनकर वह कुएँ में उतर गई और गोता लगाकर फिर कभी बाहर नहीं आई॥ 22॥ |
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| ‘At that time the king said to the queen - 'Devi! Dive into the water of this well cautiously.' On hearing these words of the king, she entered the well and dived and never came out again.॥ 22॥ |
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