श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.192.2 
अथाचष्ट मार्कण्डेयोऽपूर्वमिदं श्रूयतां ब्राह्मणानां चरितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब मार्कण्डेयजी बोले - 'राजन्! ब्राह्मणों का यह अद्भुत चरित्र सुनो॥2॥
 
Then Markandeyaji said – ‘King! Listen to this wonderful character of Brahmins. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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