श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.192.15 
तत्राभ्याशस्थोऽपि कश्चिन्नापश्यदथ प्रधानामात्योऽभ्याशचरास्तस्य स्त्रियोऽपृच्छत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘इतने निकट होने पर भी कोई उसे देख नहीं सकता था।’ तब एक दिन प्रधानमंत्री ने राजा के साथ रहने वाली स्त्रियों से पूछा-॥15॥
 
‘Despite being there so close, no one could see him. Then one day the Prime Minister asked the women living with the King -॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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