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mahabharat 3.192.14: सेना ने बैठे हुए राजा को चारों ओर से घेर लिया। राजा अच्छी तरह विश्राम करके स्वच्छ और चिकनी पालकी में बैठकर अपने नगर को चले गए और वहाँ पहुँचकर उस नवविवाहिता सुन्दरी के साथ अकेले रहने लगे॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.192.14 
सा सेनोपविष्टं राजानं परिवार्यातिष्ठत्। पर्याश्वस्तश्च राजा तयैव सह शिबिकया प्रायादव-घोटितया स स्वं नगरमनुप्राप्य रहसि तया सहास्ते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सेना ने बैठे हुए राजा को चारों ओर से घेर लिया। राजा अच्छी तरह विश्राम करके स्वच्छ और चिकनी पालकी में बैठकर अपने नगर को चले गए और वहाँ पहुँचकर उस नवविवाहिता सुन्दरी के साथ अकेले रहने लगे॥14॥
 
‘The army stood surrounding the seated king from all sides. After taking a good rest, the king sat in a clean and smooth palanquin and left for his city and after reaching there, he started living alone with the newly married beautiful lady.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)