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mahabharat 3.191.6-7: उस समय चोर और डाकू 'हे माता', 'हे पिता' और 'हे पुत्र' आदि कहकर ऊँचे स्वर में वेदनापूर्ण स्वर में चिल्लाएँगे और भगवान कल्कि उन सबका नाश कर देंगे। भारत! जब लुटेरों का नाश हो जाएगा, तो अधर्म का भी नाश हो जाएगा और धर्म की वृद्धि होने लगेगी। इस प्रकार सत्ययुग आने पर सभी मनुष्य धर्माचरण में तत्पर हो जाएँगे। 6-7।   |   mahabharat अध्याय 3.191: भगवान् कल्कीके द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 191: भगवान् कल्कीके द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.191.6-7 
हा मातस्तात पुत्रेति तास्ता वाच: सुदारुणा:।
विक्रोशमानान् सुभृशं दस्यून्नेष्यति संक्षयम्॥ ६॥
ततोऽधर्मविनाशो वै धर्मवृद्धिश्च भारत।
भविष्यति कृते प्राप्ते क्रियावांश्च जनस्तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय चोर और डाकू 'हे माता', 'हे पिता' और 'हे पुत्र' आदि कहकर ऊँचे स्वर में वेदनापूर्ण स्वर में चिल्लाएँगे और भगवान कल्कि उन सबका नाश कर देंगे। भारत! जब लुटेरों का नाश हो जाएगा, तो अधर्म का भी नाश हो जाएगा और धर्म की वृद्धि होने लगेगी। इस प्रकार सत्ययुग आने पर सभी मनुष्य धर्माचरण में तत्पर हो जाएँगे। 6-7।
 
At that time, thieves and robbers will cry out loudly in pain-filled voices saying 'Oh Mother', 'Oh Father' and 'Oh Son' etc. and Lord Kalki will destroy them all. Bharat! When the robbers are destroyed, unrighteousness will also be destroyed and righteousness will start increasing. In this way, when Satyayug arrives, all men will be devoted to righteous deeds. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)