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mahabharat 3.191.30-31h: यदि तुम मेरे वचनों पर संदेह करोगे, तो तुम्हारा धर्म नष्ट हो जाएगा। हे कुल रत्न भरत! तुम प्रसिद्ध कौरव कुल में उत्पन्न हुए हो; अतः मन, वाणी और कर्म से इन उपदेशों का पालन करो।   |   mahabharat अध्याय 3.191: भगवान् कल्कीके द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 191: भगवान् कल्कीके द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  3.191.30-31h 
आशङ्कॺ मद्वचो ह्येतद् धर्मलोपो भवेत् तव।
जातोऽसि प्रथिते वंशे कुरूणां भरतर्षभ॥ ३०॥
कर्मणा मनसा वाचा सर्वमेतत् समाचर।
 
 
अनुवाद
यदि तुम मेरे वचनों पर संदेह करोगे, तो तुम्हारा धर्म नष्ट हो जाएगा। हे कुल रत्न भरत! तुम प्रसिद्ध कौरव कुल में उत्पन्न हुए हो; अतः मन, वाणी और कर्म से इन उपदेशों का पालन करो।
 
If you doubt my words, your Dharma will be lost. O Bharata, the jewel of the clan. You were born in the famous Kaurava clan; therefore, follow these instructions in your mind, speech and actions. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)