Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.191.20-21h: हे निष्पाप राजन! मेरी यह शुभ वाणी, जो मैं अब तुमसे कह रहा हूँ, समझो। युधिष्ठिर! तुम्हें कभी भी ब्राह्मण का अनादर नहीं करना चाहिए; क्योंकि यदि ब्राह्मण क्रोधित होकर कोई प्रतिज्ञा कर ले, तो उस प्रतिज्ञा के अनुसार वह सम्पूर्ण जगत का विनाश कर सकता है। | mahabharat अध्याय 3.191: भगवान् कल्कीके द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निबोध च शुभां वाणीं यां प्रवक्ष्यामि तेऽनघ।
न ब्राह्मणे परिभव: कर्तव्यस्ते कदाचन॥ २०॥
ब्राह्मण: कुपितो हन्यादपि लोकान् प्रतिज्ञया।
अनुवाद
हे निष्पाप राजन! मेरी यह शुभ वाणी, जो मैं अब तुमसे कह रहा हूँ, समझो। युधिष्ठिर! तुम्हें कभी भी ब्राह्मण का अनादर नहीं करना चाहिए; क्योंकि यदि ब्राह्मण क्रोधित होकर कोई प्रतिज्ञा कर ले, तो उस प्रतिज्ञा के अनुसार वह सम्पूर्ण जगत का विनाश कर सकता है।
O sinless king! Understand this auspicious speech of mine, which I am telling you now. Yudhishthira! You should never disrespect a Brahmin; because if a Brahmin gets angry and vows to do something, then according to that vow he can destroy the entire world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥