| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 191: भगवान् कल्कीके द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 3.191.1  | मार्कण्डेय उवाच
ततश्चोरक्षयं कृत्वा द्विजेभ्य: पृथिवीमिमाम्।
वाजिमेधे महायज्ञे विधिवत् कल्पयिष्यति॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | मार्कण्डेय कहते हैं: युधिष्ठिर! उस समय भगवान कल्कि समस्त चोरों, लुटेरों और म्लेच्छों का नाश करके अश्वमेध नामक महान यज्ञ करेंगे, जिसमें वे सम्पूर्ण पृथ्वी को विधिपूर्वक ब्राह्मण को दान कर देंगे॥ 1॥ | | | | Mārkaṇḍeyā says: Yudhishthir! At that time, after destroying all thieves, robbers and mlecchas, Lord Kalki will perform a great sacrifice called Ashwamedha in which he will give away the entire earth to a Brahmin in a proper manner.॥ 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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