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mahabharat 3.190.84-86h: जब युग का अंत आएगा, तब कौवे, हाथी, शकुन, पशु-पक्षी बिजली की गड़गड़ाहट के समान कठोर वचन बोलेंगे। उस समय के लोग अपने मित्रों, सम्बन्धियों, सेवकों और परिवारजनों को बिना किसी कारण त्याग देंगे। 84-85 1/2।   |   mahabharat अध्याय 3.190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 84-86h
 
 
श्लोक  3.190.84-86h 
निर्घातवायसा नागा: शकुना: समृगद्विजा:॥ ८४॥
रूक्षा वाचो विमोक्ष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते।
मित्रसम्बन्धिनश्चापि संत्यक्ष्यन्ति नरास्तदा॥ ८५॥
जनं परिजनं चापि युगान्ते पर्युपस्थिते।
 
 
अनुवाद
जब युग का अंत आएगा, तब कौवे, हाथी, शकुन, पशु-पक्षी बिजली की गड़गड़ाहट के समान कठोर वचन बोलेंगे। उस समय के लोग अपने मित्रों, सम्बन्धियों, सेवकों और परिवारजनों को बिना किसी कारण त्याग देंगे। 84-85 1/2।
 
When the end of the age arrives, crows, elephants, omens, animals and birds will speak harsh words like the thunder of lightning. People of that time will abandon their friends, relatives, servants and family members without any reason. 84-85 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)