Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.190.66-67: युग के अंत में शूद्र लोग द्विज जातियों की सेवा नहीं करेंगे। जब वह समय आएगा, तब महर्षियों के आश्रमों, ब्राह्मणों के घरों, मंदिरों, चैत्यवृक्षों और नागालयों के आसपास की भूमि पर हड्डियों से जड़ी हुई दीवारों के चिह्न होंगे; परन्तु मंदिर उस भूमि की शोभा नहीं बढ़ाएँगे। 66-67. | mahabharat अध्याय 3.190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शूद्रा: परिचरिष्यन्ति न द्विजान् युगसंक्षये।
आश्रमेषु महर्षीणां ब्राह्मणावसथेषु च॥ ६६॥
देवस्थानेषु चैत्येषु नागानामालयेषु च।
एडूकचिह्ना पृथिवी न देवगृहभूषिता॥ ६७॥
अनुवाद
युग के अंत में शूद्र लोग द्विज जातियों की सेवा नहीं करेंगे। जब वह समय आएगा, तब महर्षियों के आश्रमों, ब्राह्मणों के घरों, मंदिरों, चैत्यवृक्षों और नागालयों के आसपास की भूमि पर हड्डियों से जड़ी हुई दीवारों के चिह्न होंगे; परन्तु मंदिर उस भूमि की शोभा नहीं बढ़ाएँगे। 66-67.
In the end of the age, Shudras will not serve the Dwija castes. When that time comes, the land around the ashrams of Maharshis, houses of Brahmins, temples, Chaityavrikshas and Nagalayas will have signs of walls studded with bones; but temples will not enhance the beauty of that land. 66-67.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥