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mahabharat 3.190.2: युधिष्ठिर बोले - वक्ताओं में श्रेष्ठ! भृगुवंशविभूषण महर्षे! हमने आपके मुख से युग के आदि में होने वाली उत्पत्ति और प्रलय के विषय में बहुत ही आश्चर्यजनक बातें सुनी हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.190.2 
युधिष्ठिर उवाच
आश्चर्यभूतं भवत: श्रुतं नो वदतां वर।
मुने भार्गव यद् वृत्तं युगादौ प्रभवात्ययम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - वक्ताओं में श्रेष्ठ! भृगुवंशविभूषण महर्षे! हमने आपके मुख से युग के आदि में होने वाली उत्पत्ति और प्रलय के विषय में बहुत ही आश्चर्यजनक बातें सुनी हैं॥2॥
 
Yudhishthir said – Best among speakers! Bhriguvanshvibhushan Maharshe! We have heard from your mouth very surprising things regarding the origin and destruction that took place at the beginning of the era. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)